विदूषक

बिना किये पूजा प्रसाद खा रहा है  ये फ़क़ीर रोज़ा न जाने इफ्तार खा रहा है    यूँ तो पेट भरता है लंगर से उसका  मयखानो को खूब कारोबार दिलवाता है    वतनपर्षतो को रोज़ बोल के ये गद्दार देशभक्ति की अपनी दुकान चला रहा है   मांस बेच के माँ का  गैरमुलकीओ को  मासूमोContinue reading “विदूषक”

जवाहर तेरी ज़रुरत पड़ी है !

    Jawahar teri zaroorat padi hei!     Jawahar teri zaroorat padi hei Deshdrohiyo ki desh mei sarkaar bani hei   Mana marne ke baad hamari dushmani hupe hei Par yeh chitthi meri janhit mei jaari hei   Tujase zabardadti 370 sign karvane ki muje saza de rahe hei Unko ban Karne ke baadContinue reading “जवाहर तेरी ज़रुरत पड़ी है !”