स्वयंवर | Swayamvar

पापा की परी अब बड़ी हो गयी है गुड़िया छोड़ अब खुद की शादी खेल रही है  बैठेबिठाए स्वयंवर रचाया जा रहा है और बारीबारी नौजवान पेश किये जा रहे है एक एक उम्मीदवार से पर्सनल मुलाकात हो रही है कठहडे आपकी अदालत के तैयार किये जा रहे है पढ़े कितना हो वाला सवाल आमदनीContinue reading “स्वयंवर | Swayamvar”

विदूषक

बिना किये पूजा प्रसाद खा रहा है  ये फ़क़ीर रोज़ा न जाने इफ्तार खा रहा है    यूँ तो पेट भरता है लंगर से उसका  मयखानो को खूब कारोबार दिलवाता है    वतनपर्षतो को रोज़ बोल के ये गद्दार देशभक्ति की अपनी दुकान चला रहा है   मांस बेच के माँ का  गैरमुलकीओ को  मासूमोContinue reading “विदूषक”

रोज़मर्रा   Shabdo ke chayan  Mein bhavnao ko kho raha hoon Zinda rahne ki chah mein Jeena  bhul raha hoon   Daudta raha hoon umr bhar aarzuo ki talash mei Trademill pe kat gaya safar dekh raha hoon   Paripakvata ke aalingan mei bachpan gawa diya jab Dupahar ki garmi mei ab subah ki kiraneContinue reading

जवाहर तेरी ज़रुरत पड़ी है !

    Jawahar teri zaroorat padi hei!     Jawahar teri zaroorat padi hei Deshdrohiyo ki desh mei sarkaar bani hei   Mana marne ke baad hamari dushmani hupe hei Par yeh chitthi meri janhit mei jaari hei   Tujase zabardadti 370 sign karvane ki muje saza de rahe hei Unko ban Karne ke baadContinue reading “जवाहर तेरी ज़रुरत पड़ी है !”